सुब्रह्मण्यम स्वामी ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में एक पिटिशन दायर की है। 2017 से उत्तराखंड में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार है। त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री है 70 में से 57 सीटें जीतकर 46.5% वोट शेयर के साथ 2017 से बीजेपी सत्ता में है। स्वामी बीजेपी से ही राज्यसभा के सांसद है और आखिर ऐसा क्या कारण था कि खुद की सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में जाना पड़ा??
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एक ट्वीट करके जानकारी दी कि उत्तराखंड सरकार ने एक आदेश पारित करके 53 मंदिरों को टेकओवर कर लिया है जिसमें उत्तराखंड के चारधाम भी शामिल है और मुख्यमंत्री ने खुद को देवस्थान बोर्ड का चेयरमैन अपॉइंट किया है। हालांकि इस पर ज्यादा बवाल नहीं हुआ और ये खबर ज्यादा हाईलाइट नहीं हुई। लेकिन कई सवाल छोड़ गई जैसे
क्या मंदिरों पर सरकार का इस तरह का अधिकार उचित है??
अगर यही कांग्रेस या अन्य पार्टियां अपने प्रदेशों में करेगी तो बीजेपी इसका विरोध करेगी??
सुब्रह्मण्यम स्वामी को खुद की पार्टी के खिलाफ कोर्ट में जाने की जरूरत क्यों पड़ी??
क्या अन्य पार्टियां किसी और धर्म के लिए इसी तरह के अधिग्रहण पर चुप रहेंगी??